राजस्थान चुनाव में अमित शाह ने झोंकी पूरी ताकत, अपनाई ये रणनीति
अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित करीब 25 केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के केंद्रीय नेता राजस्थान में बुधवार को भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपनी पार्टी के लिए धुंआधार प्रचार करेंगे.
राजस्थान का चुनाव प्रचार अपने अंतिम पड़ाव पर है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी रणनीति के तहत पार्टी की पूरी ताकत राजस्थान चुनाव में झोंक दी है. अमित शाह का पूरा फोकस अंतिम समय में अपने चुनावी मैनेजमेंट पर है.
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हनुमानगढ़, सीकर और जयपुर में रैली की. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रायपुर, कोटड़ी, कापरेन में रैलियां कीं और टोंक में रोड शो किया. इसके अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अभिनेत्री और सांसद हेमा मालनी, ओमप्रकाश माथुर और शाहनवाज हुसैन ने चुनावी सभा को संबोधित किया.
अमित शाह और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित करीब 25 केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के केंद्रीय नेता राजस्थान में बुधवार को भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपनी पार्टी के लिए धुंआधार प्रचार करेंगे. अमित शाह की रणनीति के तहत ये सभी केंद्रीय मंत्री और बड़े नेता प्रचार के बाद अलग अलग जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस को घेरेंगे.
मंगलवार को राजस्थान में मंडल स्तर पर आरएसएस पदाधिकारियों ने संघ के स्वयंसेवकों के साथ बैठक की. इन स्वयंसेवकों को निर्देश दिए गए हैं कि 7 दिसंबर को मतदान के दिन सुबह से अपने गली मोहल्ले और परिचित लोगों में वोटर को मतदान केंद्र पर लेकर जाएं.
बीजेपी ने भी संगठन स्तर पर जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया है कि जिले के सभी बूथ पर इंचार्ज की कोऑर्डिनेशन टीम के संपर्क में रहें. सभी उम्मीदवार अपनी विधानसभा के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा के सभी बूथ इंचार्ज और पन्ना प्रमुखों के साथ 6 दिसंबर को बैठक करें. बूथ इंचार्ज और पन्ना प्रमुख किसी भी प्रकार की समस्या बताते हैं तो उसका समाधान तुरंत किया जाए.
अमित शाह की चुनाव जीतने की रणनीति में चुनावी अर्थमैटिक के साथ- साथ चुनावी केमिस्ट्री का भी रोल रहता है इसलिए अमित शाह ने अपने अर्थमैटिक से पहले पार्टी की बिगड़ी हुई केमिस्ट्री को सुधारने के लिए नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें चुनाव में जिम्मेदारी देकर उनकी नाराजगी को दूर करने काम किया.
अमित शाह चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी हैं वो अच्छी तरह जानते हैं कि अपने नाराज कार्यकर्ताओं को कैसे मनाया जाता है. पीठ थपथपाने के साथ उन्हें चुनाव में जिम्मेदारी देकर उनके महत्व को बरकार रखना उन्हें आता है.
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